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गुलजार की शायरी दर्द भरी - Gulzar Shayari

Gulzar Ki Shayari, Gulzar Dard Bhari Shayari, Gulzar Shayari In Hindi, गुलजार साहब की दर्द भरी शायरियां लेकर आए हैं।
छोड़ दो ये बहाने
जो तुम करते हो
हमें भी अच्छे से मालूम है
मज़बूरियाँ तभी आती हैं
ज़ब दिल भर गया हो..
देर से गूंजते हैं सन्नाटे
जैसे हमको पुकारता है कोई
कल का हर वाक़िया था
तुम्हारा आज की दास्ताँ है हमारी..
एक सपने के टूटकर
चकनाचूर हो जाने के बाद
दूसरा सपना देखने के
हौसले का नाम जिंदगी हैं..
तन्हाई की दीवारों पर
घुटन का पर्दा झूल रहा हैं
बेबसी की छत के नीचे
कोई किसी को भूल रहा हैं..
दीवाने तो हम उसे देखकर हुआ करते थे
मिलना तो बस एक बहाना होता था
जान छिड़कते थे उसकी अदाओं पर
बस हमारा शर्माना ही तो प्यार का पैमाना होता था...
तेरी तरह बेवफा निकले
मेरे घर के आईने भी
खुद को देखूं
तेरी तस्वीर नजर आती है..
कोई जिस्म पर अटक गया
कोई दिल पर अटक गया
इश्क उसका ही मुकमल हुआ
जो रूह तक पहुच गया..
Gulzar Dard Bhari Shayari
मेरे दर्द को भी आह का हक़ हैं
जैसे तेरे हुस्न को निगाह का हक़ है.
मुझे भी एक दिल दिया है भगवान ने
मुझ नादान को भी एक गुनाह का हक़ हैं..
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gulzar Shayari
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