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मिर्जा गालिब की मशहूर शेरो शायरी

मिर्जा गालिब उर्दू और फारसी के महान शायर थे। उनमें हजारों शायरियां लिखी हैं। उनमें से Mirza Ghalib की मशहूर शेरो शायरी लेकर आए हैं।
Mirza Ghalib shero shayari
मोहब्बत में नहीं है फ़र्क जीने और मरने का,
उसी को देखकर जीते हैं जिस क़ाफ़िर पे दम निकले..
आईना क्यों न दूँ कि तमाशा कहें जिसे,
ऐसा कहाँ से लाऊँ कि तुझ सा कहें जिसे..
Mirza Ghalib Hindi Shayari
उन के देखे से जो आ जाती है मुँह पर रौनक,
वो समझते हैं बीमार का हाल अच्छा है..
मिर्जा गालिब शेरो शायरी
बेवजह नहीं रोता कोई इश्क़ में ग़ालिब
जिसे ख़ुद से बढकर चाहो वो रुलाता ज़रूर है..
इश्क़ पर जोर नहीं है ये वो आतिश 'ग़ालिब'
कि लगाये न लगे और बुझाये न बुझे..
ये न थी हमारी किस्मत कि विसाल-ए-यार होता,
अगर और जीते रहते यही इंतज़ार होता.
जला है जिस्म जहाँ दिल भी जल गया होगा
कुरेदते हो जो अब राख जुस्तजू क्या है..
मिर्जा गालिब की ओर शेरो शायरी पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
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