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Wasim Barelvi की मशहूर शायरियां

वसीम बरेलवी का जन्म- 8 फरवरी 1940 को उनके ननिहाल बरेली में हुआ था, बचपन का नाम जाहिद हसन था, वसीम बरेलवी हिन्दी शायरी और उर्दू शायरी के मशहूर शायर हैं, इस पोस्ट में Wasim Barelvi की चुनिंदा शेर और शायरियां को लेकर आएं।
एक मंज़र पे ठहरने नहीं देती फ़ितरत,
उम्र भर आँख की क़िस्मत में सफ़र लगता है.
वसीम बरेलवी शायरी
निगाहों के तक़ाज़े चैन से मरने नहीं देते,
यहाँ मंज़र ही ऐसे हैं कि दिल भरने नहीं देते.
जो मुझ में तुझ में चला आ रहा है सदियों से,
कहीं हयात उसी फ़ासले का नाम न हो.
वसीम बरेलवी शायरियां
दिल की बिगड़ी हुई आदत से ये उम्मीद न थी,
भूल जाएगा ये इक दिन तिरा याद आना भी.
Wasim Barelvi
ऐसे रिश्ते का भरम रखना कोई खेल नहीं,
तेरा होना भी नहीं और तेरा कहलाना भी..
वो मेरे सामने ही गया और मैं,
रास्ते की तरह देखता रह गया..
जहाँ रहेगा वहीं रौशनी लुटाएगा,
किसी चराग़ का अपना मकाँ नहीं होता.
किसी से कोई भी उम्मीद रखना छोड़ कर देखो,
तो ये रिश्ता निभाना किस क़दर आसान हो जाए.
वसीम बरेलवी
वसीम बरेली की मशहूर शेरो शायरियां पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
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